8/08/2016

भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार-2016 के निर्णायक उदय प्रकाश का आधिकारिक वक्‍तव्‍य

(कवयित्री शुभमश्री को मिले भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार पर विवाद लगातार जारी है। उनकी कविताओं का हर कोई अपने तरीके से मूल्‍यांकन कर रहा है और पक्ष या विपक्ष में आवाज़ें आ रही हैं। ऐसे में यह जानना ज़रूरी हो जाता है कि पुरस्‍कार के निर्णायक कथाकार उदय प्रकाश ने क्‍या सोच कर 'पोएट्री मैनेजमेंट' को इस बार का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार दिया। निर्णायक के वक्‍तव्‍य के बाद शायद कुछ धूल छंटे और स्‍वस्‍थ बहस का रास्‍ता खुले। जनपथ पर पढ़ें निर्णायक उदय प्रकाश का 2016 के भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार पर आधिकारिक वक्‍तव्‍य - मॉडरेटर) 



भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार-2016 के निर्णायक उदय प्रकाश का आधिकारिक वक्‍तव्‍य

(कवयित्री शुभमश्री को मिले भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार पर विवाद लगातार जारी है। उनकी कविताओं का हर कोई अपने तरीके से मूल्‍यांकन कर रहा है और पक्ष या विपक्ष में आवाज़ें आ रही हैं। ऐसे में यह जानना ज़रूरी हो जाता है कि पुरस्‍कार के निर्णायक कथाकार उदय प्रकाश ने क्‍या सोच कर 'पोएट्री मैनेजमेंट' को इस बार का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार दिया। निर्णायक के वक्‍तव्‍य के बाद शायद कुछ धूल छंटे और स्‍वस्‍थ बहस का रास्‍ता खुले। जनपथ पर पढ़ें निर्णायक उदय प्रकाश का 2016 के भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार पर आधिकारिक वक्‍तव्‍य - मॉडरेटर) 



8/04/2016

ये शहर आब को तरसेगा चश्‍म-ए-तर के बगैर...


बनारस: सावन, 2016 


अभिषेक श्रीवास्‍तव 





एक 

ये कहानी सावन की है। सावन, जो बीते कुछ वर्षों में पहली बार ऐसे आया है गोया वाकई पहली बार ही आया हो। वरना हर बार सावन बीत जाता था और मन सूखा रह जाता था। इस बार चहुंओर बरसा है। ठीकठाक बरसा है। इस बारिश का ही जादू था, रामजी यादव के न्‍योते का कम, कि हम बीते शनिवार झोला उठाकर कांवडि़यों की भीड़ को चीरते हुए काशी विश्‍वनाथ से खरामा-खरामा बनारस पहुंच गए।


7/21/2016

हाशिम अंसारी होने का मतलब


शाह आलम



''जब मैंने सुलह की पैरवी की थी तब हिन्दू महासभा सुप्रीम कोर्ट चली गई। महंत ज्ञानदास ने पूरी कोशिश की थी कि हम हिंदुओं और मुस्लिमों को इकट्ठा करके मामले को सुलझाएं, लेकिन अब मुकदमे का फैसला कयामत तक नहीं हो सकता है। इस मुद्दे को लेकर सभी नेता अपनी रोटियां सेक रहे हैं....बहुत हो गया अब''।  


7/05/2016

ऑपरेशन जवाहरबाग: कचहरी में भटकता एक काला कोट


रामवृक्ष यादव के वकील तरणी कुमार गौतम 

अगर कोई एक शख्‍स 2 जून की घटना के बाद साहस और सरोकार के साथ धारा के खिलाफ तैर रहा है तो वह है रामवृक्ष का वकील तरणी कुमार गौतम, जिसे यह भी पता नहीं है कि उसका क्‍लाइंट जिंदा है या मर गया। 11 जून की सुबह मुलाकात करने का वादा कर के गौतम बाद में तीन बार फोन नहीं उठाते और आधा घंटा अपने चैंबर नंबर 21 में इंतज़ार करवाने के बाद अचानक पसीना पोंछते हुए प्रकट होते हैं। दो और व्‍यक्ति जो काफी देर से उनका इंतज़ार कर रहे थे, उन्‍हें देखते ही खड़े हो जाते हैं। पहला व्‍यक्ति कुछ शिकायती लहजे में मुंह बनाता है तो वे जवाब देते हें, ''तुम्‍हारी ही तारीख लेने गया था.. कोर्ट से आ रहा हूं। सारा काम निपटा दिया।'' वे उसे एक काग़ज़ पकड़ाते हैं और बदले में वह व्‍यक्ति उन्‍हें 100 रुपये का नोट थमाता है। उसके चले जाने के बाद वे हमारी ओर मुड़ते हैं।

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