11/22/2016

नोटबंदी के खिलाफ़ जनता का गीत


हमें हिसाब चाहिए
(गीतकार: पीयूष बबेले, वरिष्‍ठ पत्रकार, इंडिया टुडे





10/22/2016

सुकमा-2011 हमले में सीबीआइ की चार्जशीट दायर, शांतिवार्ता के लिए कोर्ट ने दिया कोलंबिया का उदाहरण


प्रेस विज्ञप्ति, 21 अक्टूबर 2016




11 मार्च और 16 मार्च 2011 के बीच सुकमा के अतिरिक्त एसपी डीएस मरावी के नेतृत्व में एक पुलिस दल ने मोरपल्ली, टाडमेटला और तिमापुरम गांवों में ‘‘एसएसपी दांतेवाड़ा के आदेश के अनुसार’’ (डीएस मरावी द्वारा दर्ज प्राथमिकी 4/2011) छापेमारी अभियान (काम्बिंग आपरेशन) चलाया। इस पुलिस दल में पुलिस, एसपीओ और सीआरपीएफ के जवाल शामिल थे। गौरतलब है कि उस समय दांतेवाडा़ के एसएसपी एस.आर.पी. कल्लूरी थे।

10/19/2016

गोलियथ पर डेविड की नैतिक जीत के बाद एक चुभता हुआ सवाल: कब अपना कम्‍फर्ट ज़ोन छोड़ोगे?



अहमर खान
(केंद्रीय मंत्री स्‍मृति ईरानी द्वारा अपनी शैक्षणिक योग्‍यता के संबंध में चुनाव आयोग को गलत जानकारी देने के मामले में इस देश के एक आम युवा ने अदालत से शिकायत की थी। पैंसठ करोड़ युवाओं की इस वीरभोग्‍या धरती पर उसका नाम कुछ भी हो सकता था, लेकिन यह दिल्‍ली के अहमर खान का ही साहस और संकल्‍प था कि उसने इतनी बड़ी पहल की और उसे डेढ़ साल तक अपने बेरोज़गार कंधों पर कुछ बेरोज़गार दोस्‍तों के सहारे ढोते रहे। ईसाई धर्मग्रंथ की परंपरा से उधार लें तो कह सकते हैं कि यह लड़ाई विशुद्ध डेविड बनाम गोलियथ की थी। एक केंद्रीय मंत्री बनाम एक अदद युवक की लड़ाई। ज़ाहिर है, अहमर केस हार गए और अदालतों ने उनके ऊपर केंद्रीय मंत्री के 'उत्‍पीड़न' का आरोप भी लगे हाथ मढ़ दिया। 

फैसले के अगले दिन फेसबुक पर आया अहमर खान का यह बयान बेहद अहम है। हम इसे अविकल प्रकाशित कर रहे हैं। अहमर ने हार नहीं मानी है और उन्‍होंने कुछ अहम सवाल हमारे लिए छोड़ दिए हैं। यह मुकदमा आगे दूसरी अदालतों में चले या नहीं, लेकिन स्‍वतंत्र भारत में इस बात की नज़ीर बेशक़ बन चुका है कि एक आम आदमी एक खास आदमी को उसकी ग़लतियों के लिए कानूनी तरीके से ''उत्‍पीडि़त'' कर सकता है। हम जिस दौर और देश में जी रहे हैं, उसमें यह डेविड की गोलियथ पर हुई जीत है, भले मुकम्‍मल न हो! - मॉडरेटर)


10/17/2016

कश्‍मीर के नए हालात को संबोधित करें!

(कश्‍मीर में जारी संकट का कोई समाधान नहीं दिख रहा, न ही कोई इसे गंभीरता से संबोधित करने की कोशिश कर रहा है। यह संकट अतीत के संकटों से बुनियादी रूप से भिन्‍न है। बीते 11 अक्‍टूबर को दि हिंदू में पूर्व राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के. नारायणन ने इस पर चिंता जताते हुए एक लेख लिखा था। यह लेख हम हिंदी में प्रस्‍तुत कर रहे हैं। अव्‍वल तो इसलिए कि इसका लेखक राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहने के बावजूद कश्‍मीर में अपनाए जा रहे सरकारी नुस्‍खों को लेकर आलोचना का स्‍वर रखता है। दूसरे इसलिए भी कि हिंदी के पाठकों को यह लेख ज़रूर पढ़ना चाहिए ताकि युद्धोन्‍माद के माहौल में थोड़ा विवेक कायम हो सके- मॉडरेटर)


10/15/2016

'नास्तिक दोस्‍तों के साथ मस्‍ती' पर हमला: एक नोट


अभिषेक श्रीवास्‍तव 





वृंदावन के ''ऐंवेंइ मस्‍ती विद नास्तिक फ्रेंड्स'' नामक आयोजन को धार्मिक गिरोहों ने दबाव और हिंसा से रुकवा दिया है। यह गलत हुआ है, सरासर गलत। इसका विरोध होना चाहिए। साथ ही आयोजन पर भी बात होनी चाहिए। उसमें जाने वालों पर भी और नास्तिकता की समझदारी पर भी, जिसे लेकर लोग वहां गए थे। इस लेख को लिखने मुझे जो वजह समझ में आ रही है, उसे मैं एक लतीफ़े से ही समझा सकता हूं। उसके बाद दार्शनिक बातें...।

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