9/15/2016

समाजवादी पार्टी की ''आउटसाइडर'' गुत्‍थी: संदर्भ सुभाष चंद्रा और कैलाश सत्‍यार्थी


अभिषेक श्रीवास्‍तव 


बाएं से जयाप्रदा, अमर सिंह, सुभाष चंद्रा, मधुर भंडारकर और सुधीर चौधरी 

कुछ बातें समझ में नहीं आती हैं। उन्‍हें यूं ही छोड़ा जा सकता है। कुछ बातें समझ कर भी समझ में नहीं आती हैं। उन्‍हें छोड़ना मुश्किल होता है।

रविवार 11 सितंबर की रात समाजवादी पार्टी के अमर सिंह ने बीजेपी से राज्‍यसभा सांसद और ज़ी मीडिया के मालिक सुभाष चंद्रा के सम्‍मान में पार्टी आयोजित की। पार्टी में दो अहम लोग नहीं आए- एक अखिलेश यादव और दूसरे ज़ी बिज़नेस के संपादक समीर अहलुवालिया। बाकी मुलायम सिंह यादव से लगायत उनका पूरा कुनबा और सभी करीबी नौकरशाह इसमें मौजूद थे। अगले दिन सुबह तीन घटनाएं हुईं।

9/13/2016

हिंदीवालों, साहित्‍य अकादमी ने सुभाष चंद्रा का लेक्‍चर सुनने को न्‍योता भेजा है! छाती पीटोगे?


अभिषेक श्रीवास्‍तव 


पिछले हिंदी दिवस को याद करिए। न सही छप्‍पन इंच लेकिन हम हिंदीवालों की छाती चौड़ी हो गई थी कि हमारा हिंदी का लेखक-कवि खुलकर मैदान में आया है, पुरस्‍कार लौटा रहा है और बरसों बाद प्रतीकात्‍मक ही सही लेकिन एक राजनीतिक कार्रवाई तो कर रहा है। पहला पुरस्‍कार 4 सितंबर को उदय प्रकाश ने लौटाया था साहित्‍य अकादमी का। इस घटना के एक साल दस दिन बाद क्‍या मंज़र है, आप जानते हैं? नहीं?

9/06/2016

(फ्री) सेक्स विमर्श को यहां से देखो राष्ट्रवादियों!



विश्‍वदीपक 
फ्री सेक्स के मुद्दे पर राष्ट्रवादियों के शुद्धतावादी अभियान का अंत हुए हालांकि कुछ वक्त बीत चुका है, लेकिन इस अंत ने उस गलनशील वैचारिकी के नंगेपन को उधेड़ने की शुरुआत कर दी है जिसे भगवाधारी फासीवादी भारत का स्वर्णिम इतिहास कहते हैं. बहस की शक्ल में चलाए गए इस अभियान के खोखलेपन ने यह साबित कर दिया है कि भगवाधारी विचारधारा न सिर्फ राजनीतिक बल्कि ऐतिहासिक-सांस्कृतिक मोर्चे पर भी कूपमंडूक, अवैज्ञानिक और अतार्किक है. इसके अनुगामियों का हाल कुएं के उस मेढक की तरह है जिसे न कुएं की गहराई का अहसास है और न ही कुएं के बाहर के आकाश का अंदाजा है. बहस शुरु हुई थी फ्री सेक्स के मुद्दे पर एपवा (ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमेन एसोशिएशन) सेक्रेटरी कविता कृष्णन की एक पोस्ट और फिर उस पोस्ट के समर्थन में कविता की मां  की समर्थन भरी स्वीकारोक्ति के बाद. जेएनयू विवाद के दौरान कविता ने अपनी एक फेसबुक पोस्ट में बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी समेत जेएनूय के कुछ शिक्षकों की सोच पर सवाल उठाते हुए लिखा कि जिस सेक्स में स्वतंत्रता का अहसास नहीं है, वह रेप के बराबर है. बस फिर क्या था सोशल मीडिया पर सक्रिय भगवाधारी सेना महान भारतीय संस्कृति, वेद-पुराण, परिवार, नैतिकता के हथियारों से लैस होकर उन पर टूट पड़ी. इस प्रक्रिया में कविता की मां का भी नाम भी घसीटा गया लेकिन कविता की मां, लक्ष्मी कृष्णन ने न सिर्फ उनका समर्थन किया बल्कि स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया कि उन्होंने फ्री सेक्स का आनंद लिया है. लक्ष्मी कृष्णन की मां के कबूलनामे ने जख्म में नमक डालने का काम किया जिसकी छटपटाहट भगवाधारियों को लंबे समय तक महसूस होगी.  


8/08/2016

भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार-2016 के निर्णायक उदय प्रकाश का आधिकारिक वक्‍तव्‍य

(कवयित्री शुभमश्री को मिले भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार पर विवाद लगातार जारी है। उनकी कविताओं का हर कोई अपने तरीके से मूल्‍यांकन कर रहा है और पक्ष या विपक्ष में आवाज़ें आ रही हैं। ऐसे में यह जानना ज़रूरी हो जाता है कि पुरस्‍कार के निर्णायक कथाकार उदय प्रकाश ने क्‍या सोच कर 'पोएट्री मैनेजमेंट' को इस बार का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार दिया। निर्णायक के वक्‍तव्‍य के बाद शायद कुछ धूल छंटे और स्‍वस्‍थ बहस का रास्‍ता खुले। जनपथ पर पढ़ें निर्णायक उदय प्रकाश का 2016 के भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार पर आधिकारिक वक्‍तव्‍य - मॉडरेटर) 



भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार-2016 के निर्णायक उदय प्रकाश का आधिकारिक वक्‍तव्‍य

(कवयित्री शुभमश्री को मिले भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार पर विवाद लगातार जारी है। उनकी कविताओं का हर कोई अपने तरीके से मूल्‍यांकन कर रहा है और पक्ष या विपक्ष में आवाज़ें आ रही हैं। ऐसे में यह जानना ज़रूरी हो जाता है कि पुरस्‍कार के निर्णायक कथाकार उदय प्रकाश ने क्‍या सोच कर 'पोएट्री मैनेजमेंट' को इस बार का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार दिया। निर्णायक के वक्‍तव्‍य के बाद शायद कुछ धूल छंटे और स्‍वस्‍थ बहस का रास्‍ता खुले। जनपथ पर पढ़ें निर्णायक उदय प्रकाश का 2016 के भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार पर आधिकारिक वक्‍तव्‍य - मॉडरेटर) 



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