9/29/2019

राजपथ वालों, सावधान... जनपथ वापस आ गया है!




लौटना सबसे सुखद क्रिया है। लौटना तब और सुखद होता है जब वह स्वैच्छिक नहीं होता। हो जाता है। बरबस। अपने आप। अचानक। किसी दिन बिना कोशिश किए।

जनपथ के साथ यही हुआ है। जनपथ लौट आया है। हिंदी से सबसे पुराने ब्लॉगों में एक फिर से आपके बीच है। बिना किसी कोशिश के। अनायास।

नोटबंदी के दौरान यह ब्लॉग बंद हुआ था। आज से तीन साल पहले। अपने आप। किसी ने यूआरएल चुरा लिया था। एक उम्मीद थी कि यूआरएल वापस आएगा।

फिर दो दिन पहले किसी मित्र ने कहा चेक कर के देखो। हमने देखा। मेरी बेपरवाही में जिसने इसे 2016 में एक दिन अचानक ले लिया था वह इसे मुक्त कर चुका था। खुले बाज़ार में पड़ा था मेरा पुराना यूआरएल। मैंने ले लिया।

आज से बारह साल पहले एक भटके हुए बनारसी सांड़ के नाम से शुरू हुआ जनपथ उस दौर में वापस आया है जब ज्यादातर लोग राजपथ की राह ले चुके हैं। पुराने ब्लॉगर वेबसाइटों और चैनलों के मालिक बन गए हैं।

वैसे में जनपथ पर अनायास वापस आ जाना सुखद है। आश्चर्यजनक रूप से सुखद।

इसका रंग ढंग वही पुराना है। कुछ भी बदला नहीं। बस थोड़ा लिंक अपडेट हुए हैं। तीन साल के दौरान मैंने जो कुछ लिखा, सब एक जगह सजा दिया है।

अब लिखूंगा। बिना परवाह किए कि कहीं छपेगा या नहीं।

आज के दौर में अपनी अड़ी का होना ज़रूरी है। जनपथ वेब पर अपना पहला प्रेम था। ताजमहल यहीं बनेगा।

कसम से।

राजपथ वालों... सावधान...! 
  


2 टिप्‍पणियां:

shree prakash ने कहा…

Cheers!

व्यालोक ने कहा…

मेरा सारा सामान है कि गायब हो गया?😢😊😊

प्रकाशित सामग्री से अपडेट रहने के लिए अपना ई-मेल यहां डालें

समकालीन तीसरी दुनिया, अक्‍टूबर-दिसंबर 2016