Open Space
View All
पंजाब: हरियाणा के साथ पानी बंटवारे पर भगवंत मान का रुख सवालों के घेरे में
भगवंत मान के बदले हुए रुख पर विपक्षी राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने आरोप लगया है कि भगवंत मान ने गुरु तेगबहादुर और गुरु गोबिंद सिंह के अनुयायी भाई कन्हैयाजी के संदर्भ को पंजाब के हिस्से का पानी अन्य राज्य हरियाणा को समर्पण करने लिए तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया है, जो अपमानजनक धर्मद्रोही है।
Voices
View All
स्वास्थ्य खर्च में लगातार गिरावट के बावजूद मंत्रालय को आवंटित करोड़ों का बजट लैप्स : JSA India
काफी कम खर्च करने का लगातार चलन बना हुआ है, जैसा कि ‘लैप्स बजट’ शीर्षक वाली पंक्ति के आंकड़ों से देखा जा सकता है। पिछले पांच साल की अवधि (वित्त वर्ष 2019-20 से वित्त वर्ष 2023-24) में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कुल 1,32,749 करोड़ रुपये सरेंडर किए।
Editor’s Choice
View All
नेपाल: इतिहास का पहिया पीछे न जाए, सतर्क रहने की जरूरत!
इस आन्दोलन का संचालन कौन लोग कर रहे थे, इसकी जानकारी अब धीरे धीरे सामने आ रही है. मुख्य किरदारों में हैं–बालेन्द्र (बालेन) शाह जो काठमांडू का मेयर है और सुदन गुरुंग जो ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ का संचालक है. टाइम पत्रिका के 2023 के टाप 100 लोगों में बालेन शाह का नाम है. सुदन गुरुंग के ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ को कुछ अमेरिकी कंपनियों से करोड़ों रूपये की वित्तीय सहायता मिली है.
Lounge
View All
छह दशक से कविता के ‘अंधेरे में’ भटकता मुक्तिबोध का कहानीकार
मुक्तिबोध की रचना-प्रक्रिया में कविता चूंकि कहानी लिख पाने में हासिल विफलता के बाद आती है (जिसका उद्देश्य महज खुद को प्रकट कर के खो देना है), फलस्वरूप मुक्तिबोध के ही लेखे ‘‘साहित्यिक फ्रॉड’’ का अनुपात उनकी कविताओं में उनकी कहानियों के बनिस्बत कहीं ज्यादा है।
COLUMN
View All
विश्व पर्यावरण दिवस : हिमालयी पारिस्थितिकी और प्लास्टिक का प्रदूषण
भारत के पारिस्थितिकी संवेदनशील हिमालय क्षेत्र में प्लास्टिक प्रदूषण का संकट दिन प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है। नाज़ुक और संवेदी पहाड़ों पर 80 फ़ीसद से अधिक प्लास्टिक कचरा सिंगल यूज खाद्य और पेय पैकिंग से उत्पन्न हो रहा है। चिंताजनक यह है कि इस कचरे में 70 फीसद तो वह प्लास्टिक है जिसे न तो रीसायकल किया जा सकता है और न ही इसका कोई बाज़ार मूल्य है।
Review
View All
देखने के तरीके: जॉन बर्जर की प्रसिद्ध किताब को पढ़ते हुए
पुस्तक हमें चित्रकला के संदर्भ में बताती है कि विशेषाधिकार संपन्न एक अल्पसंख्यक तबक़ा (एलीट क्लास) अतीत की कला के रहस्यीकरण का इस्तेमाल अंततः वर्तमान में प्रभुत्वशाली वर्ग की भूमिका को न्यायोचित सिद्ध करने के लिए करता है।
Blog
View All
आज के तकनीकी युग में भी किताबों का महत्त्व कम क्यों नहीं हुआ है…
जब व्यक्ति पढ़ता है, तो वह यह सीखता है कि किसी भी बात को आँख मूँदकर स्वीकार करना आवश्यक नहीं है। यही पढ़ने की आदत धीरे-धीरे तर्कवादी दृष्टि को जन्म देती है, जहाँ “क्यों” और “कैसे” जैसे प्रश्न केंद्रीय हो जाते हैं।















