Open Space

View All

हमरा के जगरनथवा बो क देले बीया: वायरल संगीत के पीछे छुपा सामाजिक अपराध

‘जगरनथवा बो’ का मामला भी लेनदेन के विवाद से ही जुड़ा है लेकिन उसने जादू-टोना, तंत्र-मंत्र का तड़का लगाकर इसे अलग ही तरीके से परोस दिया है। इससे पीछे मीडिया के जरिये पाखंडी धर्माचार्यों और ज्योतिषियों का दुष्प्रचार भी है, जो लोगों को मानसिक रूप से घेरे हुए है।

Voices

View All

जहां अस्तित्व ही प्रतिरोध है: प्रलेस के आयोजन में छलका फलस्तीन का दर्द

यह अवसर था प्रगतिशील लेखक संघ की भोपाल इकाई द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम का जिसका शीर्षक था ‘जहां अस्तित्व ही प्रतिरोध है। कार्यक्रम के आरंभ में विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ कवि-कथाकार कुमार अम्बुज ने अपने विशिष्ट और नपेतुले अंदाज में बहुत सलीके से विषय को श्रोताओं के सामने खोला।

Editor’s Choice

View All

नेपाल: इतिहास का पहिया पीछे न जाए, सतर्क रहने की जरूरत!

इस आन्दोलन का संचालन कौन लोग कर रहे थे, इसकी जानकारी अब धीरे धीरे सामने आ रही है. मुख्य किरदारों में हैं–बालेन्द्र (बालेन) शाह जो काठमांडू का मेयर है और सुदन गुरुंग जो ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ का संचालक है. टाइम पत्रिका के 2023 के टाप 100 लोगों में बालेन शाह का नाम है. सुदन गुरुंग के ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ को कुछ अमेरिकी कंपनियों से करोड़ों रूपये की वित्तीय सहायता मिली है.

Lounge

View All

छह दशक से कविता के ‘अंधेरे में’ भटकता मुक्तिबोध का कहानीकार

मुक्तिबोध की रचना-प्रक्रिया में कविता चूंकि कहानी लिख पाने में हासिल विफलता के बाद आती है (जिसका उद्देश्य महज खुद को प्रकट कर के खो देना है), फलस्वरूप मुक्तिबोध के ही लेखे ‘‘साहित्यिक फ्रॉड’’ का अनुपात उनकी कविताओं में उनकी कहानियों के बनिस्बत कहीं ज्यादा है।

COLUMN

View All

विश्व पर्यावरण दिवस : हिमालयी पारिस्थितिकी और प्लास्टिक का प्रदूषण

भारत के पारिस्थितिकी संवेदनशील हिमालय क्षेत्र में प्लास्टिक प्रदूषण का संकट दिन प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है। नाज़ुक और संवेदी पहाड़ों पर 80 फ़ीसद से अधिक प्लास्टिक कचरा सिंगल यूज खाद्य और पेय पैकिंग से उत्पन्न हो रहा है। चिंताजनक यह है कि इस कचरे में 70 फीसद तो वह प्लास्टिक है जिसे न तो रीसायकल किया जा सकता है और न ही इसका कोई बाज़ार मूल्य है।

Review

View All

देखने के तरीके: जॉन बर्जर की प्रसिद्ध किताब को पढ़ते हुए

पुस्तक हमें चित्रकला के संदर्भ में बताती है कि विशेषाधिकार संपन्न एक अल्पसंख्यक तबक़ा (एलीट क्‍लास) अतीत की कला के रहस्यीकरण का इस्तेमाल अंततः वर्तमान में प्रभुत्वशाली वर्ग की भूमिका को न्यायोचित सिद्ध करने के लिए करता है।

Blog

View All

आज के तकनीकी युग में भी किताबों का महत्त्व कम क्यों नहीं हुआ है…

जब व्यक्ति पढ़ता है, तो वह यह सीखता है कि किसी भी बात को आँख मूँदकर स्वीकार करना आवश्यक नहीं है। यही पढ़ने की आदत धीरे-धीरे तर्कवादी दृष्टि को जन्म देती है, जहाँ “क्यों” और “कैसे” जैसे प्रश्न केंद्रीय हो जाते हैं।