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मध्य प्रदेश: वनाधिकार कानून में महिलाओं के साथ जारी ‘ऐतिहासिक अन्याय’ का प्रश्न
यदि भूमि पर वास्तविक नियंत्रण पुरुषों के हाथ में है, यदि महिलाएँ निर्णय प्रक्रिया से बाहर हैं, यदि सामुदायिक अधिकारों में उनकी भूमिका सीमित है—तो यह कहना कठिन होगा कि ऐतिहासिक अन्याय पूरी तरह समाप्त हो गया है। बल्कि कई बार ऐसा लगता है कि वह नए प्रशासनिक और सामाजिक रूपों में जारी है।
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तटीय इलाकों में गहरा रहा है जलवायु परिवर्तन का संकट: रिपोर्ट
महाराष्ट्र और गुजरात के तटीय इलाके एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संक्रमण के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इससे मुंबई उपनगर के गर्मियों के समय के अधिकतम तापमान में 1.3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी होने का अनुमान है। यह गर्मी से बचने की योजनाओं की बढ़ती जरूरत पर जोर देता है।
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नेपाल: इतिहास का पहिया पीछे न जाए, सतर्क रहने की जरूरत!
इस आन्दोलन का संचालन कौन लोग कर रहे थे, इसकी जानकारी अब धीरे धीरे सामने आ रही है. मुख्य किरदारों में हैं–बालेन्द्र (बालेन) शाह जो काठमांडू का मेयर है और सुदन गुरुंग जो ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ का संचालक है. टाइम पत्रिका के 2023 के टाप 100 लोगों में बालेन शाह का नाम है. सुदन गुरुंग के ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ को कुछ अमेरिकी कंपनियों से करोड़ों रूपये की वित्तीय सहायता मिली है.
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छह दशक से कविता के ‘अंधेरे में’ भटकता मुक्तिबोध का कहानीकार
मुक्तिबोध की रचना-प्रक्रिया में कविता चूंकि कहानी लिख पाने में हासिल विफलता के बाद आती है (जिसका उद्देश्य महज खुद को प्रकट कर के खो देना है), फलस्वरूप मुक्तिबोध के ही लेखे ‘‘साहित्यिक फ्रॉड’’ का अनुपात उनकी कविताओं में उनकी कहानियों के बनिस्बत कहीं ज्यादा है।
COLUMN
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विश्व पर्यावरण दिवस : हिमालयी पारिस्थितिकी और प्लास्टिक का प्रदूषण
भारत के पारिस्थितिकी संवेदनशील हिमालय क्षेत्र में प्लास्टिक प्रदूषण का संकट दिन प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है। नाज़ुक और संवेदी पहाड़ों पर 80 फ़ीसद से अधिक प्लास्टिक कचरा सिंगल यूज खाद्य और पेय पैकिंग से उत्पन्न हो रहा है। चिंताजनक यह है कि इस कचरे में 70 फीसद तो वह प्लास्टिक है जिसे न तो रीसायकल किया जा सकता है और न ही इसका कोई बाज़ार मूल्य है।
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काशी: पुस्तक परिचर्चा के दौरान शहर की बहुलतावादी संस्कृति पर सघन बहस
काशी की समावेशी छवि पर सवाल उठाते हुए उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ दिया कि वर्ष 1957 से पहले काशी विश्वनाथ मंदिर में दलितों के प्रवेश को लेकर पाबंदियां थीं। यह मान लेना कि काशी हमेशा से पूरी तरह समरस और समानतापूर्ण रही है, इतिहास की जटिलताओं को नजरअंदाज करना होगा।
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हरियाणा : महिला सुरक्षा के ढांचे की कमियों पर सखी मंडल के अनुभव
सखी मंडल के साथ कार्य करते हुए, हरियाणा के विभिन्न जिलों में यह बार-बार सामने आया है कि समस्या संसाधनों या योजनाओं की अनुपस्थिति से अधिक, प्रक्रियाओं की असंगति और क्रियान्वयन की अनिश्चितता से जुड़ी है। किसी भी नीति की प्रभावशीलता उसके डिजाइन से कम, और उसके क्रियान्वयन की संरचना से अधिक निर्धारित होती है।















