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मध्य प्रदेश: वनाधिकार कानून में महिलाओं के साथ जारी ‘ऐतिहासिक अन्याय’ का प्रश्न
यदि भूमि पर वास्तविक नियंत्रण पुरुषों के हाथ में है, यदि महिलाएँ निर्णय प्रक्रिया से बाहर हैं, यदि सामुदायिक अधिकारों में उनकी भूमिका सीमित है—तो यह कहना कठिन होगा कि ऐतिहासिक अन्याय पूरी तरह समाप्त हो गया है। बल्कि कई बार ऐसा लगता है कि वह नए प्रशासनिक और सामाजिक रूपों में जारी है।
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अत्यंत खतरनाक कीटनाशकों का संकट: हिमाचल प्रदेश को क्यों चाहिए एक सुरक्षित कृषि भविष्य
हिमाचल प्रदेश में यह संकट अन्य राज्यों की कृषि चुनौतियों से अलग है। सेब और बेमौसमी सब्जियों जैसी नकदी फसलों की खेती, तथा वर्षाकालीन मटर उत्पादन के लिए सामुदायिक और वन भूमि को शाकनाशियों के माध्यम से साफ करने की प्रथा, रासायनिक कृषि पर अत्यधिक निर्भरता पैदा करती है।
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नेपाल: इतिहास का पहिया पीछे न जाए, सतर्क रहने की जरूरत!
इस आन्दोलन का संचालन कौन लोग कर रहे थे, इसकी जानकारी अब धीरे धीरे सामने आ रही है. मुख्य किरदारों में हैं–बालेन्द्र (बालेन) शाह जो काठमांडू का मेयर है और सुदन गुरुंग जो ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ का संचालक है. टाइम पत्रिका के 2023 के टाप 100 लोगों में बालेन शाह का नाम है. सुदन गुरुंग के ‘हामी नेपाल’ नामक एनजीओ को कुछ अमेरिकी कंपनियों से करोड़ों रूपये की वित्तीय सहायता मिली है.
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सुविधा और दृश्यता के एक ईवेंट में नैतिक वैधता, विश्वसनीयता और प्रामाणिकता का प्रश्न
राजनीतिक सफलता का अर्थ केवल सही तर्क होना नहीं है। उसका अर्थ सही तर्क को उस भाषा में प्रस्तुत करना भी है जिसे समाज का बड़ा हिस्सा समझ सके। गांधी इसी कला के उस्ताद थे। उन्होंने जटिल राजनीतिक विचारों को अत्यंत सरल प्रतीकों में बदल दिया। यही कारण था कि उनका संदेश देश के सबसे दूरस्थ गाँव तक पहुँच गया।
COLUMN
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विश्व पर्यावरण दिवस : हिमालयी पारिस्थितिकी और प्लास्टिक का प्रदूषण
भारत के पारिस्थितिकी संवेदनशील हिमालय क्षेत्र में प्लास्टिक प्रदूषण का संकट दिन प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है। नाज़ुक और संवेदी पहाड़ों पर 80 फ़ीसद से अधिक प्लास्टिक कचरा सिंगल यूज खाद्य और पेय पैकिंग से उत्पन्न हो रहा है। चिंताजनक यह है कि इस कचरे में 70 फीसद तो वह प्लास्टिक है जिसे न तो रीसायकल किया जा सकता है और न ही इसका कोई बाज़ार मूल्य है।
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काशी: पुस्तक परिचर्चा के दौरान शहर की बहुलतावादी संस्कृति पर सघन बहस
काशी की समावेशी छवि पर सवाल उठाते हुए उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ दिया कि वर्ष 1957 से पहले काशी विश्वनाथ मंदिर में दलितों के प्रवेश को लेकर पाबंदियां थीं। यह मान लेना कि काशी हमेशा से पूरी तरह समरस और समानतापूर्ण रही है, इतिहास की जटिलताओं को नजरअंदाज करना होगा।
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झांसी : मिस कॉल से बदल रही महिलाओं की दुनिया
महिलाओं को केवल 9899 383851 नंबर पर एक मिस-कॉल देनी होती है। कॉल कटते ही कुछ ही क्षणों में दिल्ली स्थित केंद्रीय सर्वर से उनके पास स्वतः कॉल वापस आती है। इस पूरी प्रक्रिया में उपयोगकर्ता का कोई खर्च नहीं होता। कॉल कनेक्ट होने पर उन्हें आवाज़ के माध्यम से निर्देश दिए जाते हैं।
















